क्या आता है आपके मन में जब अपने दोस्तों की फेसबुक फीड में देखते है की वो ऊटी घूम रहे हैं? यही ना की कैसी जगह हैं क्या मौसम हैं और क्या खास हैं ऊटी की वादियों में,  जी हाँ वादियों में| क्यूंकि ऊटी बसा हैं नीलगिरि पर्वत की गोद में| मौसम यहां का रूमानी हैं, मिजाज थोड़े तूफानी हैं, और ठंडी हवायें यहां की निशानी हैं| यूँ तो एक आम धारणा है हम लोगो की कि दक्षिण भारत है तो चिलचिलाती धूप और गर्मी ना हो तो बेमानी होगी, चेन्नई तामब्रम जैसी जगह इस धारणा को पोषित भी करती है यहां दिनभर पानी में डूबे रहो फिर भी बाहर निकलने पर पसीने से तर हो जाओगे, और वैसे भी पानी की उपलब्धता भी कम ही है| खैर यह किस्सा किसी और पोस्ट में, अभी रुख करते है ऊटी की तरफ| अपने आस पास के मौसम से हटकर ऊटी का मौसम सर्द सुहावना है| उस पर यहां पाये जाने वाले नारियल ताड़ सुपारी के पेड़ इस जगह की खूबसूरती को निखार के प्रस्तुत करते है|

  सुलूर से 90 किलोमीटर दूर ऊटी अपने चाय कॉफी और चॉकलेट की उत्पादकता के लिए भी जाना जाता है | ऊटी जाने के रास्ते में ही चाय के बागान,कहवा के खेत, और स्थानीय निर्मित चॉकलेट आपका मन मोह लेते है| सोचो पहाड़ काट कर बनाये हुये संकरे रास्ते, Hair pin turn (यही कहते है उन मोड़ को जो अचानक से बिलकुल विपरीत दिशा में घूम जाते है), बड़े बड़े नारियल ताड़ सुपारी के बाग जो बिलकुल  सीधे खडे हो समान ऊंचे समान मोटे और पंक्तिबद्ध मानो किसी सेना की कवायद हो, हिरन मोर बन्दर नीलगाय और न जाने कितने जानवरों क्रीड़ा, और साफ सुथरी सड़के जिन पर बीच बीच में झरने की फुहार झड़ रही हो, को देख कर कैसा अनुभव होता होगा| और फिर अगर इन नजारों को आप किसी धीमे चलने वाली रेलगाड़ी से देख पाये तो क्या महसूस करेंगे आप|    
शायद आपको अमीर खुसरो की पंक्ति याद आ जाये जो उन्होंने कश्मीर के लिए कही थी कि गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त/ हमी अस्तो हमी अस्तो हमी अस्त” (धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं)|

ऊटी का इतिहास का पन्ना पलटे तो पाएंगे कि ऊटी का नाम  सबसे पहले 1821 में मद्रास  गजट में प्रकाशित हुआ,  ऊटी का वास्तविक नाम उदगमण्डलम है जो संक्षिप्त रूप में उधगई और ऊटी दोनों नाम से जाना जाता है, यह तमिलनाडु के नीलगिरि  जिले के अंतर्गत आता है| निकटतम शहर कोयम्बटूर से  86 किलोमीटर तथा मैसूर से 128 किलोमीटर की दूरी पड़ती है ऊटी की|

कैसे पहुंचे
अगर आप फ्लाइट से ऊटी जाना चाहते हैं तो यहां से केवल 86 किमी दूर कोयंबटूर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। इस खूबसबरत हिल स्टेशन पर आप ट्रेन से भी जा सकते हैं मेतुपलयम रेलवे स्टेशन सबसे करीबी रेलवे स्टेशन है। ऊटी से इसकी दूरी 40 किमी है।

इन जगहों पर घूमना न भूलें
नीलगिरी माउंटेन
अगर आप प्रकृति के खूबसूरत नजारों को अपने पार्टनर के साथ इंजॉय करना चाहते हैं तो नीलगिरी के खूबसूरत पहाड़ों से बेहतर क्या होगा। टॉय ट्रेन की सवारी करते हुए सुंदर नजारों को देखना अलग ही अनुभव होता है। स्टीम इंजन वाली ये ट्रेन आपको मेतुपलयम रेलवे स्टेशन से ऊटी तक ले जाएगी। इस बीच खूबसूरत पहाड़ी वादियों से गुजरना कपल्स के लिए काफी रोमांचक अनुभव होगा।

ऊटी लेक में बोटिंग
ऊटी लेक 1824 में बना था। ऊटी का सबसे बड़ा सेंटर ऑफ अट्रेक्शन बन चुके इस लेक पर कई फिल्मों की भी शूटिंग हुई है। कपल्स के बीच में फेमस इस लेक में अपने पार्टनर के साथ बोट राइड का मजा जरूर लें। साथ में बिताया यह समय आपको हमेशा याद रहेगा।

बॉटनिकल गार्डन
ऊटी का बॉटानिकल गार्डन 1847 में मद्रास के गर्वनर ने बनवाया था। यह गार्डन देश के सबसे पुराने बॉटनिकल गार्डन्स में से एक है। कपल्स यहां हाथों में हाथ डाले लंबी वॉक का मजा ले सकते हैं।

एमरल्ड लेक
मेन ऊटी शहर से 22 किलोमीटर दूर एमरल्ड लेक है जो साइलंट वैली नैशनल पार्क के अंदर स्थित है। यह पूरा इलाका अपने शांत वातावरण और जंगली वनस्पतियों के लिए जाना जाता है। नेचर लवर्स के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। अगर कपल्स एक दूसरे के साथ शांत जगह पर टाइम स्पेंड करना चाहते हैं तो यहां जरूर जाएं।

चर्च
ब्रिटिश राज के दौरान ऊटी अंग्रेजों की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक रहा है। इस वजह से यहां कई पुराने चर्च मौजूद हैं। आप किसी भी चर्च को देखें वहां की वास्तुकला और शैली आपको इंप्रेस करेगी।